Our Introduction

श्री गौशाला एवं औषधालय ट्रस्ट... २०१६ में श्री विजयभाई राबडिया ने इस ट्रस्ट की स्थापना की... २०१४ में उनको गौशाला बनाने का विचार आया था, उनका बचपन ग्राम्य विस्तार (आरबटिंबडी – जेतपुर) में ही बिता था... घर में भी तीन से चार गौमाता का संग था इसलिए गौमाता से आत्मीयता बचपन से ही थी... २०११ में हड्मताला जहा उनकी व्यावसायिक फेक्टरी है, उन्होंने दो गौमाता को रख के शुरुआत की... २०११ से २०१४ तक दो में से छह गौमाता हो गई... २०१४ में उन्होंने पंचगव्य का अभ्यास शुरू किया... खेरालु-महेसाणा से उन्होंने पंचगव्य डिप्लोमा कोर्ष किया और इसके अलावा खुद से और आयुर्वेद ग्रंथो का अभ्यास शुरू किया... चरकसंहिता, अष्टांगह्र्द्यम, सुश्रुत, आर्याभिषेक, माधवनिदान, भेन्सज्य रत्नावली (औषधियों का समिश्रण ), आहारशास्त्र जैसे मूल ग्रंथो का इसमें समावेश होता है....

our cows