Nasya (Nasika Aushadh)

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सर दर्द, आधाशीशी, शरीर का कम्पन, मगज में गांठ, पेरालिसिस, शरदी, कफ, अस्थमा, सायनस, अनिद्रा, खर्राटे, और आँख, कान संबंधी सभी व्याधियां, एलर्जी, साइनस और दिमाग से जुडीं शरीर की और कोई भी व्याधि में हमें नस्य लेने से लाभ होता हैं ।

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Description

इस औषध मे गौ धृत को बाकी के चार गव्य (दूध,दही,गो मूत्र, गोमय रस) मे सिध्द किया जाता हे |

नस्य कैसे डालें :-
सबसे पहले नस्य भरी हुइ काँच की बोतल गरम पानी में रखकर गोल गोल घुमायें और औषध को पिघलायें और हल्का गरम होने पर मरीज को चारपाई पर इस तरह सुलाना है कि उनकी गरदन चारपाई से बाहर जमीन की और लटकती रहे । नाक का खुला भाग छत की ओर रहेगा । दोनों नाक में तीन चार बूंद घृत डाल दें, अब सांस साधारण लेनी है । लंबी सांस ना खींचे, साथ में ए. सी. या ठंडी हवा १० मिनिट तक नाक पर न आने दे, १० मिनिट बाद ठीक से सो जायें ।

सर दर्द, आधाशीशी, शरीर का कम्पन, मगज में गांठ, पेरालिसिस, शरदी, कफ, अस्थमा, सायनस, अनिद्रा, खर्राटे, और आँख, कान संबंधी सभी व्याधियां, एलर्जी, साइनस और दिमाग से जुडीं शरीर की और कोई भी व्याधि में हमें नस्य लेने से लाभ होता हैं ।

व्याधि कि तिव्रता को ध्यान में रखते हुए दिन में एक बार, दो बार या तीन बार प्रयोग कर सकते है ।

 

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